The Concept of Life ( Rise of Human) PART- 1

  भाग -2                                             मानव का  उदय 

 
पिछले भाग में हमने पढ़ा की कैसे एककोशिकीय जीव का जन्म जल में हुआ , और कैसे पृथ्वी का वातावरण सामान्य हुआ , आइये आज हम पढ़ेंगे की  पृथ्वी पर सर्व प्रथम मानव का जन्म कैसे हुआ और उसने खुद के अस्तित्व के लिए क्या क्या किया ,

माना जाता है कि पृथ्वी पर जीवन संभव होने तक पृथ्वी चार चरण से होकर गुजरती है , जिसमें  से दो चरण की ठीक ठीक व्याख्या नहीं मिलती , परन्तु तीसरे तथा चौथे चरण में पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ और यही से मानव का उदय हुआ। 

सवाल ये है की आखिर इन दो चरणों में क्या हुआ होगा ,

और तीसरे -चौथे चरण में ही कैसे जीवन संभव हो पाया ?

पहला चरण -

हालाकिं इसका जवाब ठीक ठीक किसी भी वैज्ञानिक के पास नहीं है परन्तु अगर अनुमान लगाया जाये तो , यह कहा जा सकता है पहले चरण में पृथ्वी एक उल्का पिंड के समान गर्म थी ,और गर्म हवाएं तथा  तूफान से चारों  तरफ तबाही  साथ ही अम्लीय वर्षा होती रही जिससे  पूरा वातावरण ही गर्म और हानिकारक था।

दूसरा चरण -

इस चरण में वातावरण में उपस्थित गैसों (नाइट्रोजन , ऑक्सीजन , हाइड्रोजन )से जल का निर्माण हुआ और पहली बार बारिश हुयी होगी , और धीरे धीरे यह सिलसिला चलता रहा , और पहले चरण की तुलना में दूसरे चरण का तापमान कुछ कम रहा और यह प्रक्रिया बार बार होती रही , जिसके कारण तापमान में गिरावट होती रही। 

तीसरा चरण -

अब बात करते हैं तीसरे चरण में लगभग पृथ्वी का तापमान लगभग सामान्य हो गया होगा और जल जमाव की स्थिति रही होगी , और इसी चरण में एककोशिकीय जीव का जल में जन्म हुआ , 

जीवों का विकास - 

एककोशिकीय जीवों के आपस में मिलने से बहुकोशिकीय जीव का निर्माण हुआ और , देखते देखते जल के अंदर असंख्य जीवों ने अपना अस्तित्व बना लिया , कुछ जीव जल में रहते थे जिन्हे जलचर कहा गया , कुछ जीव स्थल पर रहने लगे जो थलचर और कुछ जीव आसमान में उड़ने लगे जो नभचर कहलाने लगे। 

सवाल ये है की जीवन तो जल में प्रारम्भ हुआ तो ये सब जीव थल और नभ में कैसे जीवित हैं ?

जीवन तो जल में शुरू हुआ परन्तु समय के साथ उनकी कोशिकाओं में परिवर्तन हुआ और इसका कारण ये है की वातावरण हमेशा एक जैसा नहीं रहा होगा जिससे उस जीव को जीवन यापन करने में कठिनाई हुयी होगी और उसने खुद की सुरक्षा और वृद्धि के लिए कुछ ऐसे किया होगा जो उसकी दिनचर्या बनती गयी होगी और बाद में जब उसने अपने संतान को जन्म दिया होगा तो आने वाली पीढ़ी में उस जीव के आनुवांशिक  गुण  पहले से ही आ गए होंगे और यही प्रक्रिया बार बार चलती रही , समय के साथ और प्राकृतिक आपदाओं के कारण जैसे ( बाढ़ , सूखा ,भूकंप , सुनामी ) उनमें बदलाव आये ,जिससे उस जीव में थल पर या नभ में रहने का गुण आ गया होगा और यह प्रक्रिया बहुत धीरे धीरे और कई पीढ़ियों के बाद हुयी है , जिसे क्रम विकास भी कहते हैं ,

यह उदाहरण बिल्कुल लैमार्क के सिद्धांतों से मेल खाती है , जैसे समय के साथ और भोजन की आवश्यकताओं के कारण  जिराफ की गर्दन लम्बी होती गयी , 

मानव के अस्तित्व में आने से करोड़ों वर्ष पहले पृथ्वी पर बहुत सारे रेंगने वाले जीव जिन्हे सरीस्रप कहते हैं वो आये साथ ही साथ स्तनधारी जीव भी जिसकी वजह से आज मानव का अस्तित्व है वे भी थे 

और साथ ही खोजों और अवशेषों से पता चलता है की एक समय ( तीसरे चरण में) पृथ्वी पर विशालकाय डायनासोर हुआ करते थे जो शाकाहारी मांसाहारी थे इनको जुरासिक एरा में रखा गया।  

Fig.1- The Family tree of Dinosaur

इन  जीवो का आतंक करोड़ों वर्षों तक रहा , इनमे से कुछ जीव उभयचर भी थे , भीषण गर्मी के कारण  इन जीवों की त्वचा बहुत मोटी और शख्त थी , इनका अंत एक उल्का पिंड के टुकड़े का  पृथ्वी से टकराने से हुआ जिससे भारी विस्फोट हुआ और पृथ्वी पर 95 प्रतिशत जीवन नष्ट हो गया और जिससे पृथ्वी पर सभी थल टुकड़ों में बिखर गए इस प्रकार इस युग का अंत हो गया। जिस प्रकार जीवों ने अपना विकास किया उसी प्रकार पौधों ने भी अपना विकास किया ,सर्वप्रथम नीले हरे शैवाल और जीवाणु जो एककोशिकीय थे उनका जन्म हुआ और बाद में उत्परिवर्तन के कारण पौधे और विशालकाय वृक्षों ने वृद्धि की। 

कई करोड़ों वर्षों तक बहुत सारे जीवों ने अपने वंश को विकसित किया और पीढ़ी दर पीढ़ी उनमें वातावरण के अनुकूल ढलने की क्षमता विकसित होती गयी और ,जीव के जाति के अंदर  कुछ उत्परिवर्तन भी हुवे जिनके कारण कुछ समानताएं भी और कुछ असमानताएं भी आयीं  तथा बार बार प्राकृतिक आपदाएं भी आती रही जिससे जीव नष्ट भी होते रहे और जन्म भी लेते रहे।  इस प्रकार जीवो का विकास क्रम हुआ। 

अब बात करते हैं कि मानव का उदय कैसे और किससे हुआ ,

चौथा चरण - ( हिमयुग से अबतक )

मान्यता यह है कि जब प्रथम हिमयुग की शुरुआत हुयी तब पृथ्वी का चौथा चरण प्रारंभ हुआ और इसी युग में आदिमानव का जन्म हुआ, यह कह पाना सही नहीं है की मानव का जन्म कैसे हुआ  , परन्तु माना जाता है कि आदिमानव का जन्म एक प्राइमेट अर्थात बन्दर से हुआ जोकि एक स्तनधारी था इसीलिए बन्दर को मानव का वंशज कहा गया , परन्तु इस पर भी कई शोधकर्ताओं के अपने अलग अलग मतभेद हैं। आप यह मान सकते हैं की मानव का जन्म एक स्तनधारी जीव से ही हुआ है इसीलिए जीवों  के वर्गीकरण में मानव को जंतु वर्ग में रखा गया। 

और इस प्रकार मानव का अस्तित्व आया। हालाँकि माना जाता है कि भारत में मानव का अस्तित्व लगभग 5 लाख वर्ष पूर्व आया परन्तु महाराष्ट्र के बोरी नामक स्थान से मिले रिपोर्ट के अनुसार मानव पृथ्वी पर 14 लाख वर्ष पूर्व आया था। 

Fig.2- मानव का क्रम विकास 

उत्परिवर्तन -किसी भी जीव के अंदर आकस्मिक परिवर्तन (कोई प्राकृतिक आपदा या कोई रासायनिक  कारण) जो उस जीव को उसी के जाति के अन्य जीवो ये अगल करे और उसके आकारिकीय या आन्तिरिक भागों में परिवर्तन कर दे उत्परिवर्तन कहलाता है। 



                                                         








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