Evolution of Human ( Rise of Human )-2
भाग 3 मानव का विकास क्रम
पिछले भाग में हमने पढ़ा कि मानव का अस्तित्व कैसा आया ,
इस भाग में हम पढ़ेंगे की मानव का विकास क्रम या विकास कैसे हुआ और क्या क्या परेशानियां रहीं होंगी जीवन यापन में ,
जरा सोचिये अगर आप विश्व के पहले मानव होते और आपको किसी जंगल में अपना जीवन यापन करना होता और आपको ये भी नहीं पता की क्या खाना है कहा रहना है तो आप कैसे जीवन यापन करते ?
इसका उत्तर किसी को नहीं पता की क्या किया जाता ,
ठीक उसी प्रकार जब पृथ्वी का पहला मानव अस्तित्व में आया होगा तो उसे किसी भी चीज़ का ज्ञान नहीं था ,
आइये इसको विस्तार से समझते हैं -
मानव के विकास को हम कुछ भागो में बाँट देते हैं -
पहला भाग -
ज्ञानेन्द्रियों का ज्ञान -
जहाँ तक हम मान सकते हैं की सर्वप्रथम मानव को खुद की ज्ञाननेंद्रियो का ज्ञान हुआ ,
उदाहरण के रूप में -
जब मानव को पहली बार भूख लगी होगी तब उसने हर उस वस्तु को खाने का प्रयास किया होगा (उसने जब अपने हाथों से उस वस्तु को उठाने के प्रयास में ये मालूम हुआ होगा की हाथों का प्रयोग किसी वस्तु को पकड़ने में उठाने में होता है) , जो उसके आस पास रही होगी ,अगर वो वस्तु खाने योग्य रही होगी तो उसे ये पता चला होगा की जब भी भूख लगने जैसी हरकत हो तो उसे उस वस्तु का ही सहारा लेना है ,
परन्तु जब वस्तु खाने योग्य न रही हो तब इसका विपरीत हुआ होगा और वो मानव बीमार भी हुआ होगा और तब उसे समझ आया की इस वस्तु को नहीं खाना चाहिए और इस प्रकार अनेकों उदाहरण हैं जो ज्ञानेन्द्रियों के विकास के बारे में हैं और इस प्रकार मानव को ज्ञानेन्द्रियों का ज्ञान हुआ।
दूसरा भाग -
निवास स्थान की पहचान -
जब मानव अस्तित्व में आये तो पृथ्वी की जलवायु बहुत ही ठंडी थी अर्थात तापमान बहुत ही कम था , उस युग को हिमयुग कहा जाता है , और वह काल पुरापाषाण काल कहा गया ,चुकि कुछ शोधकर्ताओं ने पुरापाषाण को भी तीन भागों में बांटा है
निम्नपुरा पाषाण काल (हिमयुग का आरम्भ)
मध्यपुरा पाषाण काल
उच्चपुरा पाषाण काल (हिमयुग का अंत )
निम्नपुरा पाषाण काल में ही मानव का अस्तित्व आया ,
अब बात करते हैं कि मानव ने अपना निवास स्थान कैसे चुना और उसे कैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा
चुकि तापमान बहुत ही कम था तो मानव जो अपने झुण्ड में रहते थे आस पास भटकते रहे गर्म स्थान की तलाश में और उन्होंने आस पास की गुफाओ का सहारा लिया , और अपने परिवार की देख रेख भी करते रहे।
अब प्रश्न ये उठता है की गुफाओ का निर्माण कैसे हुआ ?
इसका उत्तर ये माना जाता है कि पृथ्वी जब गर्म रही होगी तो बाद में मैग्मा ( लावा ) के ठन्डे होने के कारण बड़ी बड़ी चट्टानों और गुफाओ का निर्माण हुआ होगा , क्योकि देखा जाये तो पत्थरों का निर्माण लावा के ठन्डे होने से ही होता है , और भूकंप और टेकटोनिक प्लेटो के खिसकने से भी भूमि और पर्वतों का निर्माण हुआ है।
तीसरा भाग -
शिकार करने का तरीका और उनके औजार -
मानव के पास न तो विकसित हथियार थे और न ही खुद की रक्षा के लिए कोई कवच , परन्तु उनके चारो तरफ पत्थर के टुकड़े और चट्टानें थीं ,पत्थर के टुकड़ो को लकड़ी की सहायता से बाँध कर हथियार बनाना सीखा और उसी से वे जन्तुओं का शिकार करते थे ,उन्ही पत्थर के टुकड़ो और सुखी लकड़ियों से उन्होंने आग की खोज की और धीरे धीरे उसपर नियंत्रण पाया , इस खोज ने मानव के जीवन को बहुत ही सरल और सामान्य कर दिया।
और इस प्रकार से मानव का विकास क्रम चलता रहा।
और इस प्रकार से मानव का विकास क्रम चलता रहा।
अब सवाल ये है कि मानव शिकार करना क्यों शुरू किया ?
तापमान के कम होने और भारी बर्फबारी के कारण सभी आस पास की खाद्य वनस्पतियाँ नष्ट हो चुकीं थीं ,और मानव के पास जानवरों पर निर्भर होने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था और यही कारण हो सकता है मानव मांसाहारी या सर्वाहारी है। और उन्ही जीवों के खाल को वो अपने शरीर को ठण्ड से बचने के लिए करने लगे , इस तरह से देखा जाये तो आदिमानव अपने परिवार के साथ विकसित होने लगे।
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| चित्र 3 - आग उत्पन्न करते आदिमानव |
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| चित्र 4 -पत्थर और लकड़ी से बने औज़ार |
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| चित्र 5-आदिमानव द्वारा शिकार |





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